रब्बर डैम गया- गयाजी रब्बर डैम- भारत का सबसे बड़ा रब्बर डैम बिहार में है|

नमस्कार दोस्तों आप लोगो को एक फिर से Hindisaine के नई आर्टिकल स्वागत है, में आज हम बात करेंगे गया के Gayaji Reber Dam के बारे में जो  बिहार के गया जिला में बनकर पूरी तरह से तैयार हो चूका है। यह रुबेर डैम पूरी तरह से बनकर तैयार है और इसे सभी सृद्धालुओं और Tourist के लिए पूर्ण रूप से ओपन कर दिया गया है आप चाहे तो इस जगह पर घूमने या पिंड दान करने के लिए जा सकते हैं। 
यह रबर डैम भारत का सबसे बड़ा और लम्बा बना है को भारत का सबसे बड़ा रबर है जो आज बिहार के गया जिला में बनकर तैयार है. वही रिकॉर्ड अब वही अब बिहार में बनाने के बाद अब भारत का सबसे बड़ा रबर डैम बिहार बन गया है। बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने इस डैम की सर्व पूर्ण उद्धघाटन कर दिया है। 


गया की रबर डैम की लम्बाई कितना है - उतर  411 मीटर है फिट में बात करे तो होता है 1348.5 फिट है। 

गया की रबर डैम की चौड़ाई कितना है - उतर  95 मीटर है फिट में बात करे तो होता है 311.8 फिट है। 

गया की रबर डैम की ऊंचाई कितना है - उतर 3 मीटर है फिट में बात करे तो होता है 8.9 फिट है| 

गयाजी की रबर डैम को बनाने में कितना लगत/खर्च लगा है - 312 करोड़ की लगत है। Report on Google.


रबर डैम कैसा है?

गया के रबर डैम की नज़ारा की बात करे तो इसका पूरा ध्यान रखा गया है ताकि जब कोई भी टूरिस्ट घूमने या पिंड दान करने आये तो अन्कंफर्टबले महसूस न करे इस लिए रबर डैम को एक खास लुक दिया गया जो देखने में लोगो एक्ट्रेक्टिव लगे। विसनुपात मंदिर के थीक बगल में एक ब्रिज तैयार किया है जिसके निचे पानी में एक पाइप का आकर जैसी रबर बिछाया गया है जिस रबर की ऊंचाई 8.9 फ़ीट है जबकि रबर की लम्बाई 411 मीटर और चौड़ाई 95 मीटर है।

गाजी रबर डैम की स्ट्रक्चर क्या है?

'Gayaji Rebber Dam' Ki Strecture in Hindi- रबर डैम की लम्बाई 411 मीटर और चौड़ाई 95 मीटर चौड़ाई रखा गया  है जबकि रबर की ऊंचाई 3 मीटर रखा गया है। रबर डैम के ठीक ऊपर सेम लम्बाई वाली ब्रिज बनाया गया है नीचे बिछाई गई रबर में तकनीकी मशीन के जरिए हवा भरी जाती है जिससे रबर की लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई को कंडिशन के हिसाब से कम या ज्यादा किया जा सकता है। रबर डैम में हवा भरने वाली मशीन का सेटप ब्रिज के एक साइड एक कमरा में किया गया है।


रबर डैम बनाने की मकसद क्या है?
What is the Purpose of Macking Gayaji Rebber Dam- रबर डैम को बनाकर तैयार करने की मुख्यतः कई रीजन हो सकते है। जैसा की आपको पता हैं की बिहार को भगवानो की भूमि मन जाता हैं जिस एक उदाहरण गया का विषुनपत मंदिर हैं। जहा दुनिया भर से टूरिस्ट घूमने और पिंड दान करने आते हैं। जिसमे पिंड दान हेतु गंगा जल को शुद्ध माना जाता हैं इसलिए वह बारहो माह पानी की कमी न हो इसका पहला कारण ये भी हैं। 

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दूसरा कारण- बिहार में रबर डैम बनाने की दूसरी वजह, बिहार को एक टूरिस्ट पैलेस बनाने की कोशिस किया जा रहा हैं जिससे बिहार एक डेवलप राज्य बन सके। भारत के सभी राज्य बिहार को अतयंत पिछड़ा राज्य समझते है। इसलिए बिहार को आगे लाने के लिए और टूरिस्ट पैलेस बनाने की कोशिस है। 

तीसरा कारण- जैसा की आपको पता होना चाहिए किसी भी डैम को तैयार करने के लिए सबसे पहले वहाँ उस स्थान या उस नदी में आने वाली पानी को रोका जाता हैं और फिर उस पानी को कुछ हाइट ऊपर से निकला जाता हैं।  डैम की हाइट होने के कारण डैम में पानी अधिक समय तक रहता हैं जिस पानी का किसी पर अन्य कामो में इस्तेमाल किया जा सकता हैं। वैसे मने तो डैम बनाकर तैयार होने पर उससे बहूत साडी लाभ हो सकते हैं। 

'गया' रबर डैम बनाने की कहानी

'गया' रबर डैम बनाने की कहानी बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 22 सितम्बर 2020 को रबर डैम का शिलान्यास किया था। अक्टूबर 2023 में इसका निर्माण का लक्ष्य रखा गया थ। मगर बिच में नीतीश कुमार ने इसे सितम्बर 2022 तक पूरा करने का निर्देश दिया इंजीनियरों ने दिन-रात मेहनत करके इसे साकार कर दिया। 

इस डैम का नाम गयाजी डैम रखा गया है जो  फल्गु नदी पर बनाया गया है फल्गु नदी गंदे पानी और कचरे का ढेर लगा रहता था। पर यहाँ रबर डैम बन जाने से इस पॉल्यूशन से मुक्ति मिल गयी। विष्णुपद देवघाट से पूर्वी तट पर बानी पिंडदेवी जाने की दुरी काम हो गई पहले बाईपास होकर प्राइवेट गाड़ी से जाना पड़ता था।। 

कुछ सृद्धालु पैदल नदी पर करते थे अब डैम के ऊपर स्टील का ब्रिज पूल बन गया है। इससे सृद्धालु देवघाट कर्मकांड कन्ने के बाद सीधे सीताकुंड पिंडदेवी का दर्शन करने जा सकते है। इसका नाम "माँ सीता पुल" रखा गया है। जबकि कनेक्टिंग रोड का नाम "माँ सीता पथ" रखा गया है। इस पुल को बन जाने से इस पैदल यात्रा को पहले तीन किलोमीटर दुरी को अब 1.5 किलोमीटर कर दिया है। 

फल्गु नदी को माँ सीता क्यों कहा जाता है 

हिन्दू धर्म में मान्यता है की मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति तीन कृत्यों से होती है,वे हैं श्रीदा, पिण्डन, तर्पण। पिण्डन और तर्पण के लिए गया का सबसे पवित्र भूमि मन जाता है क्योकि ऐसा पुराणों में बताया गया है पुराणी कथाओं में इस बात का भी जिक्र है की गयाजी त्रिथ में स्वय भगवन श्रीराम अपने परिवार के साथ पिता दशरथ का पिंडदान करने आये थे। 

राम और लक्ष्मण श्रीदा का सामान जुटाने गए, तभी माता सीता में राजा दशरथ का श्रीदाकर दिया। पुराणों में कहा गया है की दशरथ की चिता का राख उड़ाते-उड़ाते गया के फल्गु नदी के पास पहुंची तब केवल वहां माता सीता मौजूद थी। तभी आकशवाणी हुयी की श्रीदाका समय खत्म हो रहा है। 

ये सुन कर माँ सीता ने फल्गु नदी की रेत से पिंड बनायीं और पिंड दान कर दिया। उन्होंने फल्गु नदी, गाय, तुलसी अक्षय वट और एक ब्राम्हण को साक्षी बनाया। जब श्रीराम और लक्ष्मण ने वापस आकर पूछे तो तो माता सीता ने पूरी बात उन्हें बताई। राम ने वहां मौहूद चारो गाय,तुलसी, अक्षय वट,ब्राम्हण, साक्षी से पूछा की पिंड दान हुआ या नही। तो फल्गु नदी ने बोल दिया। इसके बाद माता सीता ने फल्गु नदी को श्राप दे दिया। उसके बाद से फल्गु नदी जमीं के नीचे बहने लगी। 

Conclusion -

दोस्तों जैसा की हमने आपको इस आर्टिकल के माधयम से आपको गयाजी के रबर डैम के बारे पूरी जानकारी bataya hai शेयर किया है की गया का रबर डैम कैसा है औररबर डैम की बनावट कैसी है/संरचना कैसी है इसके बारे में ऊपर में विस्तार में जानकारी शेयर किया है। और हमने आपको यह भी बताया की गया की रबर डैम बनाने की मकसद क्या था। 

वैसे तो रबर डैम बनाने की अनेको जरूत थी इसे में से हमने कुछ इम्पोर्टेन्ट तीन बातो का जीकर किया है। और इम्पोर्टेन्ट बात दोस्तों यह है की गयाजी का रबर डैम को बनाने कितना खर्च लगा और रबर डैम की लम्बाई कितना है/ रबर डैम की हाइट कितना है/ रबर डैम की चौड़ाई कितना है। 

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